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पर्यावरण संरक्षण के लिए आपकी व्यक्तिगत सामाजिक भूमिका अहम् है

नए अध्ययन से सूर्य के बाहरी वायुमंडल (सौर कोरोना) के रहस्यमय रूप से अधिक गर्म होने के निदान का मार्ग प्रशस्त हुआ

सूर्य के बाहरी वायुमंडल या कोरोना में छिपी अशांति का पता लगाने का एक नया तरीका वैज्ञानिकों को इस लंबे समय से चले आ रहे रहस्य के बारे में नई जानकारी हासिल करने में मदद कर सकता है कि कोरोना सूर्य की दृश्य सतह की तुलना में बहुत अधिक गर्म क्यों है। सूर्य का बाहरी वायुमंडल यानी कोरोना चुंबकीय संरचनाओं से भरा हुआ है जो तरंगों के प्रवाह के साथ लगातार हिलतस रहतस है। इनमें सबसे आम हैं अनुप्रस्थ चुंबकीय जलगतिकीय (एमएचडी) तरंगें , जिन्हें अक्सर अल्फ़वेनिक या किंक तरंगें कहा जाता है। ये तरंगें इन चुंबकीय संरचनाओं के साथ बाहर की ओर बढ़ते हुए कोरोना की संरचनाओं को अगल-बगल दोलन कराती हैं। स्पेक्ट्रोस्कोपी के अनुसार ऐसी तरंगें प्रत्यावर्ती लाल और नीले डॉप्लर शिफ्ट उत्पन्न करती हैं , जो चुंबकीय क्षेत्र के लंबवत अनुप्रस्थ गतियों के कारण प्रेक्षक की ओर और उससे दूर जाने वाले प्लाज्मा के संकेत हैं। हालांकि , क्या ये प्रसारित अनुप्रस्थ तरंगें कोरोनल स्पेक्ट्रल रेखाओं के आकार को भी संशोधित कर सकती हैं , जिससे अन्यथा गाऊसी प्रोफाइल में मापने योग्य विषमताएं उत्पन्न हो सकती हैं , यह अभी तक अवलोकन के आधार पर स...
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वन अधिकारी की जिम्मेदारी सेवानिवृत्ति के बाद भी समाप्त नहीं होती, क्योंकि वे सदैव ‘मूक वनस्पतियों और जीव-जन्तुओं की आवाज’ बने रहते हैं- श्री भूपेंद्र यादव

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने भारतीय वन सेवा के मध्य-करियर प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रतिभागियों से संवाद किया ; उन्हें "मूक वनस्पतियों और जीव-जंतुओं की आवाज" बताया केंद्रीय पर्यावरण , वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने आज नई दिल्ली में भारतीय वन सेवा के मध्य-करियर प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रतिभागियों को संबोधित किया। इस कार्यक्रम में केंद्रीय पर्यावरण , वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री श्री कीर्तिवर्धन सिंह और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। अपने प्रेरणादायक संबोधन में श्री यादव ने कहा कि ' विकसित भारत ' का मार्ग ' हरित भारत ' से होकर गुजरता है और उन्होंने वैश्विक संरक्षण प्रयासों में भारत की बढ़ती नेतृत्वकारी भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि एक वन अधिकारी की जिम्मेदारी सेवानिवृत्ति के बाद भी समाप्त नहीं होती , क्योंकि वे सदैव ‘मूक वनस्पतियों और जीव-जन्तुओं की आवाज’ बने रहते हैं। मंत्री महोदय ने प्रतिभागियों को यह भी जानकारी दी कि भारत जून के प्रथम सप्ताह में पहली बार आयोजित होने वाले अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट एलायंस (आईबीसीए) शि...

चीता परियोजना: मजबूत प्रगति और उज्ज्वल भविष्य दर्शाती है भारत की ऐतिहासिक वन्यजीव पुनर्स्थापन पहल

  पर्यावरण , वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में आज चीता परियोजना की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई , जिसमें कार्यक्रम की प्रगति का आकलन किया गया और भविष्य की कार्ययोजना पर विचार-विमर्श किया गया। बैठक में पर्यावरण , वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (एमओईएफसीसी) के वरिष्ठ अधिकारी , परियोजना विशेषज्ञ और देश में वन्यजीव संरक्षण से जुड़े वरिष्ठ प्रक्षेत्र अधिकारी उपस्थित थे। चीता परियोजना भारत में चीतों के विलुप्त होने के बाद उन्हें पुनः स्थापित करने के उद्देश्य से शुरू की गई एक अग्रणी पहल है। इस कार्यक्रम की शुरुआत नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से 20 चीतों के एक संस्थापक समूह को स्थानांतरित करके की गई थी , जिसमें समन्वित अंतरराष्ट्रीय सहयोग और वैज्ञानिक योजना के माध्यम से बोत्सवाना से 9 चीतों को और शामिल किया गया। वन्यजीवों के स्थानांतरण से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद , इस परियोजना ने उत्साहजनक परिणाम दर्ज किए हैं। वर्तमान में चीतों की संख्या 53 है , जिनमें से 33 भारत में जन्मे हैं। यह भारतीय परिस्थितियों में सफल अनुकूलन और प्रजनन के कारण हुई महत्वपू...

जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत केंद्र ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह तथा पश्चिम बंगाल के साथ सुधार-संबंधी समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए ये समझौता ज्ञापन विकसित भारत @2047 के विजन के अनुसार, पारदर्शिता, जवाबदेही और समुदाय-केंद्रित ग्रामीण जल आपूर्ति प्रबंधन मॉडल को आगे बढ़ाने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हैं।

जल जीवन मिशन 2.0 के अंतर्गत सुधारों से जुड़े कार्यान्वयन को राष्ट्रव्यापी स्तर पर जारी रखते हुए , केंद्र शासित प्रदेश अंडमान और निकोबार द्वीप समूह तथा पश्चिम बंगाल राज्य ने आज केंद्र सरकार के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए। सुधारों से जुड़े इस समझौता ज्ञापन में ग्राम पंचायत के नेतृत्व वाले , सेवा-आधारित और समुदाय-केंद्रित ग्रामीण जल प्रबंधन मॉडल को लागू किया गया है , जो जल जीवन मिशन 2.0 के उद्देश्यों के अनुरूप है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी. आर. पाटिल , जल शक्ति मंत्रालय में राज्य मंत्री श्री वी. सोमन्ना , डीडीडब्ल्यूएस सचिव श्री अशोक के. के. मीणा और डीडीडब्ल्यूएस के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में अलग-अलग निर्धारित बैठकों के दौरान समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह केंद्र शासित प्रदेश के लिए समझौता ज्ञापन पर श्रीमती स्वाति मीना नाइक , संयुक्त सचिव (जल) , डीडीडब्ल्यूएस और डॉ. सचिन शिंदे , सचिव , आयुक्त-सह-सचिव , अंडमान और निकोबार द्वीप समूह केंद्र शासित प्रदेश के बीच हस्ताक्षर किए गए। समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान श्री विनोद कुमार यादव ,...

दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण से संबंधित प्रमुख एजेंडा बिंदुओं की समीक्षा हेतु सीएक्यूएम की 28वीं पूर्ण आयोग बैठक आयोजित

  दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की 28 वीं पूर्ण आयोग बैठक 15.05.2026 को श्री राजेश वर्मा की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक के दौरान दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण से संबंधित प्रमुख एजेंडा बिंदुओं पर विस्तृत विचार-विमर्श और समीक्षा की गई। आयोग ने सीएक्यूएम अधिनियम , 2021 की धारा 12 के अंतर्गत मसौदा निर्देश संख्या 99 जारी करने को स्वीकृति प्रदान की , जो वर्ष 2026 में धान की पराली जलाने की रोकथाम और नियंत्रण हेतु कार्ययोजना के कार्यान्वयन से संबंधित है। इसका उद्देश्य एनसीआर राज्यों में धान की पराली जलाने की घटनाओं को पूर्णतः समाप्त करना है। आयोग ने उल्लेख किया कि राज्य सरकारों ने सीएक्यूएम द्वारा प्रदान किए गए व्यापक ढांचे के अनुरूप धान कटाई सत्र- 2026 के लिए राज्य-विशिष्ट कार्ययोजनाएं तैयार और अद्यतन की हैं। आयोग ने मसौदा निर्देश संख्या 100 जारी करने को भी स्वीकृति दी , जिसके अंतर्गत क्षेत्र में स्वच्छ गतिशीलता को बढ़ावा देने और वाहनों से होने वाले उत्सर्जन में कमी लाने के उद्देश्य से दिल्ली-एनसीआर में चरणबद्ध तरीके से केव...

छत्तीसगढ़ के धमतारी जिले में भूमि संसाधन विभाग के सचिव श्री नरेंद्र भूषण ने वाटरशेड विकास परियोजनाओं की समीक्षा की, प्रतिनिधिमंडल ने सुरक्षात्मक सिंचाई, आजीविका संवर्धन और मृदा एवं जल संरक्षण संबंधी पहलों की समीक्षा की

भारत सरकार के भूमि संसाधन विभाग के सचिव श्री नरेंद्र भूषण के नेतृत्व में ग्रामीण विकास मंत्रालय के एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को छत्तीसगढ़ के धमतारी जिले के मगरलोद ब्लॉक में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 ( डब्ल्यूडीसी-पीएमकेएसवाई 2.0) के वाटरशेड विकास घटक के अंतर्गत वाटरशेड विकास परियोजनाओं का व्यापक क्षेत्र दौरा किया। प्रतिनिधिमंडल ने सुरक्षात्मक सिंचाई , आजीविका संवर्धन और मृदा एवं जल संरक्षण पर केंद्रित विभिन्न पहलों की समीक्षा की। इस प्रतिनिधिमंडल में संयुक्त सचिव (वाटरशेड प्रबंधन) श्री नितिन खाडे और जिला अधिकारी श्री अबिनाश मिश्रा शामिल थे। सांकरा गांव के दौरे के दौरान , सचिव ने वाटरशेड विकास घटक (डब्ल्यूडीसी) और मनरेगा के संयुक्त प्रयासों से निर्मित 40.34 लाख रुपये की लागत से बने एक स्टॉप डैम का निरीक्षण किया। इस डैम से लगभग 80-85 एकड़ भूमि सिंचित हो गई है और 50 से अधिक किसानों को लाभ मिल रहा है। बेलाउदी गांव में , प्रतिनिधिमंडल ने 20.20 लाख रुपये की लागत से विकसित 430 मीटर लंबी सिंचाई नहर की समीक्षा की , जो वर्तमान में लगभग 150 एकड़ भूमि को सिंचित कर ...

आईआईटीएम पुणे में अत्याधुनिक इनक्यूबेशन सेंटर का उद्घाटन, जलवायु उद्यमिता परिवर्तनकारी बदलाव के लिए डबल्यूआईएसई-2026 सम्मेलन आयोजित

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय  के अंतर्गत भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान -आईआईटीएम , पुणे ने आज मौसम और जलवायु क्षेत्र में स्टार्टअप्स के लिए समर्पित इनक्यूबेशन सेंटर का उद्घाटन किया। इस अवसर पर नए स्टार्टअप्स और उद्यमियों के लिए एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन , मौसम और जलवायु नवाचार सम्मेलन -ड्ब्ल्यू आई एस ई- 2026 आयोजित किया गया जो भारत की मौसम विज्ञान सेवाओं में निजी क्षेत्र के एकीकरण के नए युग का संकेतक है।  मुख्य अतिथि , पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय सचिव डॉ. एम.रविचंद्रन ने इनक्यूबेशन सेंटर का उद्घाटन किया। समारोह में विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय उन्नत अध्ययन संस्थान- एनआईएएस के निदेशक और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के पूर्व सचिव डॉ. शैलेश नाइक , आईआईटीएम के निदेशक डॉ. ए सूर्यचंद्र राव और अन्य विशिष्ट गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहें। यह इन्क्यूबेशन सेंटर राष्ट्रीय वायुमंडलीय प्रौद्योगिकी उद्यम (एनईएटी) का एक महत्वपूर्ण घटक है , जो पृथ्‍वी विज्ञान मंत्रालय के मिशन मौसम के अंतर्गत महत्वाकांक्षी परियोजना है , जिसका उद्देश्य सार्वजनिक-निजी भागीदारी द्वारा प्रौद्योगिकी विकास को बढ़ावा देना है...

पर्यावरण को प्रदूषित करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही करने की प्रक्रिया भी इस वेब साईट पर प्रकाशित है

पर्यावरण को प्रदूषित करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही करने की प्रक्रिया भी इस वेब साईट पर प्रकाशित है
पर्यावरण नियमों का अनुपालन नहीं करने के आरोपी लोगों को दण्डित किये जाने की क़ानूनी प्रक्रिया और वर्त्तमान में लागु प्रावधान भी इस वेबसाइट पर प्रकाशित है - इसलिए इस वेब साईट से जानकारी लीजिये और पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यवहारिक तौर पर संभव होने वाली क़ानूनी प्रक्रिया को अपनाकर पर्यावरण संरक्षण का प्रयास कीजिये

जानिए - पर्यावरण संरक्षण के व्यवहारिक क़ानूनी उपाय! जिनका प्रयोग करना पर्यावरण संरक्षण हेतु जरुरी है

जानिए - पर्यावरण संरक्षण के व्यवहारिक क़ानूनी उपाय! जिनका प्रयोग करना पर्यावरण संरक्षण हेतु जरुरी है
इस वेबसाइट पर उपलब्ध है "पर्यावरण विधि का संकलन" - उल्लेखनीय है कि, हमारी जीवन दायिनी वसुंधरा के संरक्षण के लिए भारत गणराज्य द्वारा अधिनियमित प्रावधानों व नियमों का संक्षिप्त परिचय और विचारणीय पहलुओं को संकलित कर इस वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया है तथा इस वेबसाईट पर पर्यावरण अधिनियम और नियम की जानकारी के साथ - साथ आपको... उन सभी कार्यवाही प्रक्रियाओं की भी जानकारी मिलेगी... जो पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्यान्वित है

पर्यावरण को संरक्षित करने के नियमों की जानकारी देने वाली वेबसाईट

पर्यावरण को संरक्षित करने के नियमों की जानकारी देने वाली वेबसाईट
पर्यावरण संरक्षण कार्यवाहियों की निगरानी सूचना का अधिकार आवेदन देकर व्यक्तिगत तौर पर करिए क्योंकि पर्यावरण को प्रदूषित कुछ लोग करते हैं और इस दुष्परिणाम सभी जिव, जंतु और मनुष्यों पर पड़ता है

प्रदुषण के प्रकार जानने के लिए निचे क्लिक करिये