गरिमा और आत्मनिर्भरता की ओर एक यात्रा आर्थिक सहायता और स्थायी आजीविका के अवसरों तक पहुंच वंचित समुदायों को सशक्त बनाने और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। स्वरोजगार और यंत्र के लिए सहायता से कम आय वाले श्रमिकों को आय के अधिक स्थिर स्रोतों की ओर बढ़ने , परिवार की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने और काम की गरिमा को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है। 30 वर्षीय सुश्री मेकाला नंचारम्मा अनुसूचित जनजाति (एसटी) समुदाय से संबंध रखती हैं। वह पिछले लगभग 12 वर्षों से गुंटूर नगर निगम में कूड़ा बीनने का काम कर रही हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने के कारण उन्हें कम उम्र में ही कूड़ा बीनने का काम करना पड़ा। घोर आर्थिक तंगी के कारण वे स्कूल नहीं जा सकीं और निरक्षर हैं। उनकी आजीविका काफी हद तक कूड़ा बीनने पर निर्भर थी , जिससे उन्हें सीमित और अनियमित आय होती थी और घर के खर्चों को पूरा करना तथा अपने बच्चों के लिए बेहतर अवसर सुरक्षित करना मुश्किल हो जाता था। बुनियादी सुविधाओं और आवश्यक सेवाओं तक सीमित पहुंच वाले झुग्गी-झोपड़ीनुमा वातावरण में रहने से उ...
30 सितंबर , 2026 को , भारत में जापान के राजदूत , महामहिम श्री केइची ओनो और तत्कालीन सचिव (एमओईएफसीसी) , श्री तन्मय कुमार ने नई दिल्ली में भारत-जापान संयुक्त ऋण तंत्र (जेसीएम) के लिए परिचालन नियमावली का संयुक्त रूप से शुभारंभ किया । भारत और जापान के बीच संयुक्त ऋण व्यवस्था का उद्देश्य उन्नत निम्न-कार्बन प्रौद्योगिकियों के उपयोग को बढ़ावा देना , जलवायु वित्त जुटाना , प्रौद्योगिकी सहयोग को सुगम बनाना और भारत में उच्च-स्तरीय उत्सर्जन कटौती एवं निष्कासन का समर्थन करना है। यह तंत्र अंतर्राष्ट्रीय कार्बन बाजारों में विश्वास और पारदर्शिता को मजबूत करते हुए भारत में सतत विकास में योगदान देगा। इस नियमावली का शुभारंभ पेरिस समझौते के अनुच्छेद 6.2 के तहत भारत और जापान के बीच द्विपक्षीय सहयोग को व्यावहारिक रूप देने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इससे पहले 7 अगस्त 2025 को सहयोग ज्ञापन (एमओसी) पर हस्ताक्षर किए गए थे और 8 जून 2026 को कार्यान्वयन के नियम (आरओआई) अपनाए गए थे। यह विकास संस्थागत तैयारी से कार्यान्वयन की ओर बढ़ने का संकेत देता है और भारत-जापान संयुक्त समन्वय परियोजना (जेसीएम) ...