सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

पर्यावरण संरक्षण के लिए आपकी व्यक्तिगत सामाजिक भूमिका अहम् है

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने दिल्ली-एनसीआर में स्वच्छ हल्के मालवाहक वाहनों की ओर चरणबद्ध बदलाव को मंजूरी दी; स्टोन क्रशिंग इकाइयों में धूल नियंत्रण को और सख्त किया

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) और आसपास के क्षेत्रों के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) की पूर्ण आयोग की 29 वीं बैठक 18 अगस्त 2026 को श्री राजेश वर्मा की अध्यक्षता में आयोजित की गई। इसमें दिल्ली-एनसीआर में पीएम 2.5 उत्सर्जन में वाहनों के क्षेत्र के महत्वपूर्ण योगदान और हल्के माल वाहनों (एलजीवी) से अत्यधिक कण उत्सर्जन को ध्यान में रखते हुए , दिल्ली-एनसीआर में चरणबद्ध तरीके से हल्के माल वाहनों के स्वच्छ मॉडलों के नए पंजीकरण को अनिवार्य करने वाले निर्देश संख्या 102 को जारी करने की मंजूरी दी गई। हल्के मालवाहक वाहन (एलजीवी) सक्रिय वाहनों की कुल संख्या का केवल लगभग 1.2 प्रतिशत हैं , लेकिन कुल सक्रिय वाहनों से होने वाले पीएम उत्सर्जन में इनकी हिस्सेदारी लगभग 3.3 प्रतिशत है। निर्देश संख्या- 102 के तहत डीजल , पेट्रोल और सीएनजी आधारित एन- 1 श्रेणी के हल्के मालवाहक वाहनों के पंजीकरण पर चरणबद्ध प्रतिबंध 1 जनवरी 2027 से दिल्ली में लागू होगा। इसके बाद 1 जुलाई 2027 से गुरुग्राम , फरीदाबाद , सोनीपत , गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर जैसे उच्च वाहन घनत्व वाले जिलों में इसे लागू कि...
हाल की पोस्ट

अपशिष्‍ट से वन तक: रायचूर ने मियावाकी रूपांतरण के माध्‍यम से 22 एकड़ भूमि का पुनरुद्धार किया

कर्नाटक के रायचूर ने स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 ( एसबीएम-यू 2.0) के तहत वैज्ञानिक तरीके से पुराने कचरे के निस्‍तारण के माध्‍यम से 35 एकड़ में फैले याकलासपुरा डंपसाइट को हरित परिसंपत्ति में बदल दिया है। अब तक लगभग 62,252 मीट्रिक टन कचरे का प्रसंस्करण किया जा चुका है और लगभग 22 एकड़ मूल्यवान शहरी भूमि का पुनरूद्धार किया गया है। पुनरूद्धार की गई यह भूमि अब टिकाऊ भू-उपयोग को बढावा दे रही है। इसमें एक जीवंत मियावाकी वन भी विकसित किया जा रहा है। यह दर्शाता है कि पुराने डंपसाइट को किस प्रकार समृद्ध पारिस्थितिक स्‍थलों में बदला जा सकता है। एसबीएम-यू 2.0 के तहत देश भर के शहर पुराने कचरा स्थलों को उत्पादक और पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ स्थलों में बदलने का कार्य कर रहे हैं। कर्नाटक के रायचूर में याकलासपुरा डंप साइट का सफल पुनरुद्धार इसी विजन का उदाहरण है। कभी पर्यावरणीय क्षरण का प्रतीक रहा यह स्‍थल अब पारिस्थितिक पुनर्स्‍थापन और सतत शहरी विकास के एक मॉडल के रूप में उभर रहा है। 35 एकड़ में फैले याकलासपुरा स्थल पर दशकों से नगरपालिका का ठोस कचरा जमा था , जिससे आसपास के समुदायों के लिए गंभीर ...

ब्रिक्स सदस्य देशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने नई दिल्ली में पर्यावरण कार्य समूह और जलवायु परिवर्तन एवं सतत विकास पर संपर्क समूह की प्रमुख प्राथमिकताओं पर चर्चा की

भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के अंतर्गत , पर्यावरण कार्य समूह और जलवायु परिवर्तन एवं सतत विकास पर संपर्क समूह के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक 17 अगस्त 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता पर्यावरण , वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव श्री तन्मय कुमार ने की। इस बैठक में ब्राजील , चीन , मिस्र , इथियोपिया , इंडोनेशिया , ईरान , रूस , दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात ने भाग लिया। अपने मुख्य भाषण में अध्यक्ष ने कहा कि पिछले दो दशकों में ब्रिक्स समूह , आर्थिक संवाद से आगे बढ़कर प्रदूषण , जैव विविधता की क्षति और ग्लोबल वार्मिंग जैसी गंभीर चुनौतियों से निपटने के लिए एक प्रभावशाली मंच के रूप में विकसित हुआ है। उन्होंने कहा कि हमारी साझेदारी सतत विकास , जलवायु अनुकूलन , संसाधन दक्षता और चक्रीय अर्थव्यवस्था के साथ-साथ पर्यावरणीय शासन के संदर्भ में भी सुदृढ़ हुई है। अध्यक्ष ने बताया कि ब्रिक्स 2026, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के उस दृष्टिकोण से प्रेरित है , जिसके अनुसार वैश्विक सहयोग में मानवता को प्राथमिकता देते हुए जन-केंद्रित दृष्टिकोण बनाए रखना...

मंगोलिया के उलानबातर में आयोजित यूएनसीसीडी कॉप-17 में भारत ने घास के मैदानों और अन्य खुले प्राकृतिक इकोसिस्टम पर पहली बार एक मार्गदर्शिका का शुभारंभ किया

  केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने वनों के साथ-साथ खुले प्राकृतिक इकोसिस्टम के विज्ञान-आधारित संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया , श्री भूपेंद्र यादव ने कहाः- स्वस्थ घास के मैदान जैव विविधता , आजीविका और जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलेपन के लिए आवश्यक हैं भारत ने 17 अगस्त 2026 को उलानबातर (मंगोलिया) में संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण निवारण सम्मेलन (यूएनसीसीडी) के पक्षकारों के सम्मेलन (कॉप- 17) के 17 वें सत्र में भारत के घास के मैदानों और अन्य खुले प्राकृतिक इकोसिस्टम (ओएनईएस) के लिए अपनी पहली मार्गदर्शिका का शुभारंभ किया। यह दस्तावेज़ भारत के घास के मैदानों , सवाना , मरुस्थलों और अन्य खुले प्राकृतिक इको-सिस्टम की समृद्ध विविधता , पारिस्थितिक महत्व और सामाजिक-आर्थिक महत्व को उजागर करता है। यह इनके संरक्षण , पुनर्स्थापन और सतत प्रबंधन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस शुभारंभ से पहले भारत सरकार के पर्यावरण , वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव का एक विशेष वीडियो संदेश प्रसारित किया गया। उन्होंने बताया कि घास के मैदानों , झाड़ियों और खाइयों को लंबे समय से वृक्षो...

जलवायु परिवर्तन से निपटने में सक्षम शहर और शहरी ताप लहरें

भारत के संविधान की 12 वीं अनुसूची के अनुसार , शहरी नियोजन राज्य सरकारों और शहरी स्तर पर शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी)/शहरी विकास प्राधिकरणों के अधिकार क्षेत्र में आता है। भारत सरकार शहरी नियोजन प्रणाली को मजबूत करने के लिए योजनाबद्ध हस्तक्षेप , सलाह , दिशानिर्देश , वित्तीय सहायता और तकनीकी सहायता के माध्यम से राज्यों के प्रयासों में सहयोग करती है। प्राप्त सूचनाओं के आधार पर , राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने 2019 में ' हीट वेव की रोकथाम और प्रबंधन के लिए कार्य योजना तैयार करने हेतु राष्ट्रीय दिशानिर्देश ' तैयार किए। इन दिशानिर्देशों के अनुसार , शहरों को शहरी हीट आइलैंड प्रभाव में योगदान देने वाले प्रमुख कारकों की पहचान करने के लिए संवेदनशील आकलन करना चाहिए और अपनी हीट एक्शन प्लान (एचएपी) में उपयुक्त शमन उपायों को शामिल करना चाहिए। 23 राज्यों , 195 जिलों और 64 शहरों द्वारा हीट एक्शन प्लान (एचएपी) तैयार किए जा चुके हैं। इसके अलावा , राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने "भारतीय शहरों में लू के दौरान अनौपचारिक श्रमिकों की सुरक्षा" पर एक सलाह जारी की है...

जल प्रबंधन एवं संरक्षण

अटल भूजल योजना , समुदाय आधारित एक सहभागी भूजल प्रबंधन योजना है , जिसका कार्यान्वयन दिनांक 01.04.2020 से 15.10.2025 की अवधि के दौरान सात राज्यों , अर्थात् गुजरात , हरियाणा , कर्नाटक , मध्य प्रदेश , महाराष्ट्र , राजस्थान और उत्तर प्रदेश के 80 जिलों के 229 ब्लॉकों के जल की अत्यधिक कमी वाले 8,203 ग्राम पंचायतों में एक पायलट योजना के रूप में किया गया था। इस योजना के अंतर्गत शामिल ग्राम पंचायतों की राज्य-वार संख्या जल संसाधन , नदी विकास और गंगा संरक्षण विभाग की वेबसाइट के निम्नलिखित वेब-लिंक पर उपलब्ध है:  https://www.jalshakti-dowr.gov.in/static/uploads/2026/07/415c128c8892e9a870e6398d9195742a.pdf अटल भूजल योजना के प्रायोगिक चरण का मुख्य उद्देश्य मांग पक्ष प्रबंधन पर केंद्रित विभिन्न केंद्रीय और राज्य योजनाओं के अभिसरण (कन्वर्जेंस) के माध्यम से सामुदायिक   नेतृत्व में उचित निवेश/प्रबंधन कार्यों का कार्यान्वयन कर चयनित राज्यों के जल की कमी वाले   क्षेत्रों में भूजल संसाधनों के प्रबंधन में सुधार करना था। इस योजना का उद्देश्य संस्थागत और शासन संबंधी ढांचे को मजबूत करते हुए...

पर्यावरण को प्रदूषित करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही करने की प्रक्रिया भी इस वेब साईट पर प्रकाशित है

पर्यावरण को प्रदूषित करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही करने की प्रक्रिया भी इस वेब साईट पर प्रकाशित है
पर्यावरण नियमों का अनुपालन नहीं करने के आरोपी लोगों को दण्डित किये जाने की क़ानूनी प्रक्रिया और वर्त्तमान में लागु प्रावधान भी इस वेबसाइट पर प्रकाशित है - इसलिए इस वेब साईट से जानकारी लीजिये और पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यवहारिक तौर पर संभव होने वाली क़ानूनी प्रक्रिया को अपनाकर पर्यावरण संरक्षण का प्रयास कीजिये

जानिए - पर्यावरण संरक्षण के व्यवहारिक क़ानूनी उपाय! जिनका प्रयोग करना पर्यावरण संरक्षण हेतु जरुरी है

जानिए - पर्यावरण संरक्षण के व्यवहारिक क़ानूनी उपाय! जिनका प्रयोग करना पर्यावरण संरक्षण हेतु जरुरी है
इस वेबसाइट पर उपलब्ध है "पर्यावरण विधि का संकलन" - उल्लेखनीय है कि, हमारी जीवन दायिनी वसुंधरा के संरक्षण के लिए भारत गणराज्य द्वारा अधिनियमित प्रावधानों व नियमों का संक्षिप्त परिचय और विचारणीय पहलुओं को संकलित कर इस वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया है तथा इस वेबसाईट पर पर्यावरण अधिनियम और नियम की जानकारी के साथ - साथ आपको... उन सभी कार्यवाही प्रक्रियाओं की भी जानकारी मिलेगी... जो पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्यान्वित है

पर्यावरण को संरक्षित करने के नियमों की जानकारी देने वाली वेबसाईट

पर्यावरण को संरक्षित करने के नियमों की जानकारी देने वाली वेबसाईट
पर्यावरण संरक्षण कार्यवाहियों की निगरानी सूचना का अधिकार आवेदन देकर व्यक्तिगत तौर पर करिए क्योंकि पर्यावरण को प्रदूषित कुछ लोग करते हैं और इस दुष्परिणाम सभी जिव, जंतु और मनुष्यों पर पड़ता है

प्रदुषण के प्रकार जानने के लिए निचे क्लिक करिये