केंद्रीय भूमि जल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) और राज्य सरकारें अपनी स्थापित प्रयोगशालाओं के माध्यम से इलेक्ट्रिकल कंडक्टीविटी , फ्लोराइड , नाइट्रेट , भारी धातुओं आदि जैसे विभिन्न गुणवत्ता मापदंडों/संदूषकों के लिए नियमित आधार पर भूजल गुणवत्ता परीक्षण और विश्लेषण करता हैं। इसके अतिरिक्त , जल शक्ति मंत्रालय द्वारा राज्यों के साथ भागीदारी में कार्यान्वित किए जा रहे जल जीवन मिशन (जेजेएम) , जिसका उद्देश्य देश के प्रत्येक ग्रामीण परिवार को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है , के तहत आपूर्ति किए जा रहे जल की गुणवत्ता के लिए भारतीय मानक ब्यूरो के बीआईएस: 10500 मानकों को मानक के रूप में अपनाया गया है। इसके अलावा , राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों द्वारा दी गई रिपोर्ट के अनुसार , फरवरी 2026 तक , जेजेएम के तहत देश भर में 2,870 जल गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाएं (जो भूजल स्रोतों को भी कवर करती हैं) चल रहीं हैं। इसके अतिरिक्त , पेयजल के नमूने एकत्र करने , परीक्षण करने और निगरानी करने की कुशल निगरानी और रिपोर्टिंग के लिए एक ऑनलाइन जेजेएम - जल गुणवत्ता प्रबंधन सूचना प्रणाली (जेजेएम-डब्ल्यूक्यूएमआईएस) पोर्ट...
संसद में प्रश्न: मौसम संबंधी संकटों के प्रभाव का आकलन करने के लिए अध्ययन पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने “भारतीय क्षेत्र पर जलवायु परिवर्तन का आकलन” शीर्षक से जलवायु परिवर्तन पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की है , जिसमें भारतीय क्षेत्र में स्थानीय जलवायु परिवर्तन के सभी पहलुओं , विशेषकर देश में उत्पन्न होने वाली चरम जलवायु परिस्थितियों का समग्र आकलन सम्मिलित है। यह रिपोर्ट नीचे दिए गए लिंक पर उपलब्ध है : https://link.springer.com/book/10.1007/978-981-15-4327-2 भारत मौसम विज्ञान विभाग (आई एम डी) ने “जलवायु खतरे और जोखिम मूल्यांकन का भारतीय एटलस” नामक एक वेब-आधारित एटलस विकसित किया है , जिसमें 13 प्रमुख खतरनाक मौसमीय घटनाओं को सम्मिलित किया गया है , जो मानव जीवन , पशुधन तथा अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव डालती हैं। यह वेब एटलस भौगोलिक सूचना प्रणाली (जी आई एस) उपकरणों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है और आई एम डी , पुणे की वेबसाइट ( https://www.imdpune.gov.in/hazardatlas/index.html ) पर उपलब्ध है। इसके अलावा आई एम डी ने पिछले 30 वर्षों के दौरान देश मे...