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पर्यावरण संरक्षण के लिए आपकी व्यक्तिगत सामाजिक भूमिका अहम् है

बाढ़ प्रबंधन एवं सीमा क्षेत्र कार्यक्रम के अंतर्गत परियोजनाएँ

  बाढ़ प्रबंधन एवं सीमा क्षेत्र कार्यक्रम के अंतर्गत परियोजनाएँ बाढ़ प्रबंधन और कटाव रोधी योजनाएँ संबंधित राज्य सरकारों द्वारा उनकी अपनी प्राथमिकता के अनुसार तैयार और कार्यान्वित की जाती हैं। केंद्र सरकार , राज्यों को तकनीकी मार्गदर्शन और गंभीर क्षेत्रों में बाढ़ प्रबंधन के लिए प्रोत्साहन हेतु वित्तीय सहायता प्रदान करके उनके प्रयासों में सहयोग करती है। केंद्र सरकार , बाढ़ नियंत्रण , कटाव रोधी , जल निकासी का विकास , समुद्री कटाव रोधी आदि कार्यों के लिए राज्यों को केंद्रीय सहायता प्रदान करने हेतु "बाढ़ प्रबंधन और सीमावर्ती क्षेत्र कार्यक्रम (एफएमबीएपी)" नामक एक केंद्रीय प्रायोजित योजना कार्यान्वित कर रही है। विगत पांच वर्षों के दौरान बाढ़ प्रबंधन और सीमावर्ती क्षेत्र कार्यक्रम (एफएमबीएपी) के तहत प्राप्त , अनुमोदित प्रस्तावों और जारी की गई केंद्रीय सहायता की राज्य/संघ राज्य क्षेत्र-वार संख्या अनुलग्नक में दी गई है। वर्ष 1986 से वर्ष 2022 तक के उपग्रह इमेजरी डेटा पर आधारित केंद्रीय जल आयोग की "भारत में बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र का आकलन ( 2024)" रिपोर्ट क...
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जैव विविधता के संरक्षण और जैविक संसाधनों के उपयोग से मिलने वाले लाभों के निष्पक्ष एवं समान वितरण को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, राष्ट्रीय जैव-विविधता प्राधिकरण (एनबीए) ने राज्य जैव-विविधता बोर्डों और केंद्र शासित प्रदेश जैव-विविधता परिषदों के जरिए लाभार्थियों के बीच 45.05 लाख रुपए का वितरण किया है।

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने 10 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में जैव विविधता प्रबंधन समितियों को 45.05 लाख रुपए वितरित किए   इस भुगतान से 10 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में स्थापित 90 से अधिक जैव विविधता प्रबंधन समितियों (बीएमसी) और आंध्र प्रदेश के 15 लाल चंदन किसानों को लाभ मिलेगा। इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में तेलंगाना , कर्नाटक , आंध्र प्रदेश , गोवा , महाराष्ट्र , असम , उत्तर प्रदेश , उत्तराखंड , हरियाणा , हिमाचल प्रदेश , दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और लद्दाख शामिल हैं। ये बीएमसी विभिन्न पारिस्थितिक और संस्थागत परिवेशों का प्रतिनिधित्व करती हैं , जिनमें गांव , शहरी स्थानीय निकाय , मैंग्रोव क्षेत्र और औद्योगिक क्षेत्र शामिल हैं। यह लाभ-साझाकरण की राशि विभिन्न जैविक संसाधनों के उपयोग से उत्पन्न हुई है , जिनमें कुछ कीट , मिट्टी और जल में पाए जाने वाले सूक्ष्मजीवों से लेकर खेती की गई लाल चंदन तक शामिल हैं। इन संसाधनों का उपयोग विभिन्न प्रकार के उत्पादों के निर्माण में किया गया , जो यह दर्शाता है कि जैव विविधता कैसे वैज्ञानिक नवाचार और जैव...

08 फरवरी 2026 तक ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली(ओसीईएमएस) की स्थिति

  दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र(एनसीआर) में औद्योगिक गतिविधियों से वायु प्रदूषण को कम करने के अपने सतत और समन्वित प्रयासों के तहत , एनसीआर और आस-पास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने अपनी निगरानी और अनुपालन तंत्र को मजबूत करने के लिए एक समर्पित ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली(ओसीईएमएस) सेल का गठन किया है। ओसीईएमएस की स्थापना और संचालन की स्वतंत्र सत्यापन प्रक्रिया के उद्देश्य से , ओसीईएमएस सेल की भूमिकाओं और कार्यों को रेखांकित करने वाला एक मानक संचालन प्रक्रिया(एसओपी) 09- अक्टूबर 2025 को एनसीआर की सभी संबंधित एजेंसियों को भेजा गया था। क्षेत्र में वायु प्रदूषण कम करने की दिशा में आयोग के नियमित प्रयासों के तहत , ओसीईएमएस सेल ने 05- फरवरी- 2026 को एक समीक्षा बैठक बुलाई थी। नवीनतम जानकारी के अनुसार , सेल ने अब तक 865 औद्योगिक प्रतिष्ठानों में ओसीईएमएस की स्थापना का सत्यापन किया है और संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों(एसपीसीबी)/प्रदूषण नियंत्रण समितियों(पीसीसी) को संरचित सुझाव दिए हैं , जिसमें 530 मामलों में नोटिस जारी करना और 122 मामलों में क्षेत्र सत्याप...

पर्यावरण को प्रदूषित करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही करने की प्रक्रिया भी इस वेब साईट पर प्रकाशित है

पर्यावरण को प्रदूषित करने वालों के विरुद्ध कार्यवाही करने की प्रक्रिया भी इस वेब साईट पर प्रकाशित है
पर्यावरण नियमों का अनुपालन नहीं करने के आरोपी लोगों को दण्डित किये जाने की क़ानूनी प्रक्रिया और वर्त्तमान में लागु प्रावधान भी इस वेबसाइट पर प्रकाशित है - इसलिए इस वेब साईट से जानकारी लीजिये और पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यवहारिक तौर पर संभव होने वाली क़ानूनी प्रक्रिया को अपनाकर पर्यावरण संरक्षण का प्रयास कीजिये

जानिए - पर्यावरण संरक्षण के व्यवहारिक क़ानूनी उपाय! जिनका प्रयोग करना पर्यावरण संरक्षण हेतु जरुरी है

जानिए - पर्यावरण संरक्षण के व्यवहारिक क़ानूनी उपाय! जिनका प्रयोग करना पर्यावरण संरक्षण हेतु जरुरी है
इस वेबसाइट पर उपलब्ध है "पर्यावरण विधि का संकलन" - उल्लेखनीय है कि, हमारी जीवन दायिनी वसुंधरा के संरक्षण के लिए भारत गणराज्य द्वारा अधिनियमित प्रावधानों व नियमों का संक्षिप्त परिचय और विचारणीय पहलुओं को संकलित कर इस वेबसाइट पर प्रकाशित किया गया है तथा इस वेबसाईट पर पर्यावरण अधिनियम और नियम की जानकारी के साथ - साथ आपको... उन सभी कार्यवाही प्रक्रियाओं की भी जानकारी मिलेगी... जो पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्यान्वित है

पर्यावरण को संरक्षित करने के नियमों की जानकारी देने वाली वेबसाईट

पर्यावरण को संरक्षित करने के नियमों की जानकारी देने वाली वेबसाईट
पर्यावरण संरक्षण कार्यवाहियों की निगरानी सूचना का अधिकार आवेदन देकर व्यक्तिगत तौर पर करिए क्योंकि पर्यावरण को प्रदूषित कुछ लोग करते हैं और इस दुष्परिणाम सभी जिव, जंतु और मनुष्यों पर पड़ता है

प्रदुषण के प्रकार जानने के लिए निचे क्लिक करिये